Monday, 23 September 2019

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का चार वर्षों में ब्रिटिश सरकार ने 22 बार किए तबादले, जानिए क्यों



रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हिंदी के कवि और निबंधकार हैं। आज 23 सितंबर को उनकी 111वीं बर्थ एनिवर्सरी है। दिनकर आधुनिक हिंदी कवियों में से एक हैं। उन्होंने अपनी कविताओं में देशभक्ति और वीररस को प्रमुखता से स्थान दिया, इसी वजह से उन्हें राष्ट्रकवि कहा जाता है।

जीवन परिचय

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का जन्म 23 सितंबर, 1908 को बिहार के मुंगेर जिले के सिमरिया में हुआ। इनके पिता रवि सिंह और माता मनरूप देवी थे। दिनकर एक किसान परिवार में जन्मे थे। जब दिनकर दो वर्ष के थे उनके पिता का देहांत हो गया। उनका व उनके भाई-बहनों का पालन-पोषण उनकी विधवा मां ने किया।
दिनकर की प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक स्कूल से हुई। बाद में पास के बोरो गांव में नेशनल मिडिल स्कूल जो सरकारी शिक्षा के विरोध में खोला गया था, में प्रवेश लिया। यहीं से उनके मन में देशभक्ति का अंकुरण होने लगा। हाई स्कूल की शिक्षा इन्होंने मोकामाघाट हाई स्कूल से प्राप्त की। इसी बीच इनकी शादी हो गई थी ओर वह एक बेटे के पिता भी बन गए। उनके सबसे पसंदीदा विषय इतिहास, राजनीति विज्ञान और दर्शनशास्त्र थे। स्कूल और कॉलेज में, उन्होंने हिंदी, संस्कृत, मैथिली, बंगाली, उर्दू और अंग्रेजी साहित्य का अध्ययन किया।
दिनकर ने पटना विश्वविद्यालय से 1932 में इतिहास में बी.ए. ऑनर्स किया। दिनकर इकबाल, रवींद्रनाथ टैगोर, कीट्स और मिल्टन से बहुत प्रभावित थे और उन्होंने बंगाली से हिंदी में रवींद्रनाथ टैगोर की कृतियों का अनुवाद किया। बी.ए. ऑनर्स के एक वर्ष बाद स्कूल में प्रधानाध्यापक नियुक्त हुए। वर्ष 1934 में बिहार सरकार ने उन्हें सब-रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त किया। करीबा नौ साल तक वह इस पद पर बने रहे। इस पद पर वह बिहार के ग्रामीण इलाकों में रहे और यहां के लोगों की दयनीय दशा का वर्णन उनकी कविताओं में दिखता है।

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